यह एडिटोरियल 17/11/2022 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “Quest for transparency in FTA negotiations” लेख पर आधारित है। इसमें भारत की वर्तमान विदेश व्यापार नीति में विद्यमान चुनौतियों और इसमें आवश्यक परिवर्तनों के बारे में चर्चा की गई है।
भारत वित्त वर्ष 2023 तक 450-500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के महत्त्वाकांक्षी निर्यात शिपमेंट लक्ष्य के साथ निर्यात-उन्मुख घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये पिछले दो वर्षों से कई भागीदारों – द्विपक्षीय और क्षेत्रीय दोनों – के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements- FTAs) पर वार्ता कर रहा है।
अभ्यास प्रश्न: भारत की अब तक की मुक्त व्यापार समझौता (FTA) यात्रा का एक अवलोकन प्रदान कीजिये और देश की विदेश व्यापार नीति में प्रमुख परिवर्तनों के सुझाव दीजिये।
Q1 पूर्ण और प्रति व्यक्ति वास्तविक जीएनपी में वृद्धि आर्थिक विकास के उच्च स्तर को नहीं दर्शाती है, यदि (वर्ष 2018)
(A) औद्योगिक उत्पादन कृषि उत्पादन के साथ तालमेल बनाए रखने में विफल रहता है।
(B) कृषि उत्पादन औद्योगिक उत्पादन के साथ तालमेल बनाए रखने में विफल रहता है।
(C) गरीबी और बेरोज़गारी में वृद्धि।
(D) निर्यात की तुलना में आयात तेज़ी से बढ़ता है।
उत्तर: (C)
Q2. SEZ अधिनियम, 2005, जो फरवरी 2006 में प्रभाव में आया, के कुछ उद्देश्य हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिये (वर्ष 2010)
उपर्युक्त में से कौन-से इस अधिनियम के उद्देश्य हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 3
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A)
Q3. एक "बंद अर्थव्यवस्था" एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसमें (वर्ष 2011)
(A) पैसे की आपूर्ति पूरी तरह से नियंत्रित है
(B) घाटे की वित्त व्यवस्था होती है
(C) केवल निर्यात होता है
(D) न तो निर्यात या आयात होता है
उत्तर: (D)